ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी आरोपियों की बरी बरकरार

बिलासपुर, 8 मई 2026: छत्तीसगढ़ के चर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने दक्षिण बस्तर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की।


“असल अपराधियों की पहचान करने में एजेंसियां असफल रहीं”

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह बेहद पीड़ादायक है कि माओवादियों के क्रूर हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए, लेकिन जांच एजेंसियां वास्तविक अपराधियों की पहचान करने और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहीं।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके चलते निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।


2013 में साक्ष्य के अभाव में हुए थे बरी

गौरतलब है कि दक्षिण बस्तर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 7 जनवरी 2013 को इस मामले में सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि निचली अदालत महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सही ढंग से समझने में विफल रही थी। हालांकि हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए अपील खारिज कर दी।


राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में फोरेंसिक जांच पर जोर

हाई कोर्ट ने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों में फोरेंसिक साक्ष्य समय पर और वैज्ञानिक तरीके से जुटाना बेहद जरूरी है, ताकि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।


2010 में हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला

यह मामला 6 अप्रैल 2010 का है, जब सुकमा जिले के ताड़मेटला क्षेत्र में सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और पुलिस बल की संयुक्त टीम पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे। इसे देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना जाता है।

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